बाराबंकी के निजामपुर का गौरव: रामकेवल ने किया अनोखा कारनामा

रात भर लाइट ढोई, फिर पढ़ाई—आजादी के 77 साल बाद गांव का पहला हाई स्कूल उत्तीर्ण
News Desk 06 May 2025, 12:03 PM 1 min read
बाराबंकी के निजामपुर का गौरव: रामकेवल ने किया अनोखा कारनामा

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के निजामपुर (मजरा अहमदपुर) गांव से आज इतिहास रचा गया, जब 23 वर्षीय रामकेवल ने 2025 की हाई स्कूल परीक्षा पास कर गाँव का 77 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। स्वतंत्र भारत के सत्तर-पचहत्तर वर्ष के सफर में इस गांव से आज तक कोई भी हाई स्कूल उत्तीर्ण नहीं कर पाया था। रामकेवल की इस उपलब्धि ने न केवल उसके परिवार का नाम रोशन किया, बल्कि पूरे गांव में शिक्षा के महत्व को नई उड़ान दी है।

परिस्थितियाँ रहीं बेहद कठिन

निजामपुर गांव में सड़कें टूटी-फूटी, बिजली व्यवस्था अस्थायी और उजाले के साधन नगण्य हैं। यहां के अधिकांश परिवारों की आजीविका मजदूरी पर निर्भर है। रामकेवल भी दिन में शादी-बारातों में लाइटें ढोकर 300 रुपये प्रतिदिन कमाता और रात देर तक धर्मपुर रोड पर खड़ी सड़कों की लाइटों के नीचे पढ़ाई करता था। “जब सब सो जाते, तब मैं टूटी-फूटी बत्ती के पास बैठकर इकाइयाँ रटता,” वह याद करता है।

मां-पिता ने दिया संकल्प और सहयोग

रामकेवल के पिता जगदीश प्रसाद निरक्षर हैं, पर मां पुष्पा ने प्राथमिक विद्यालय में रसोइया का काम करके बेटे की फीस जुटाई। “बचपन में भाई को डिबरी चमक में पढ़ते देखते, मैंने ठान लिया था कि मेरे बच्चे को अंधेरों में नहीं, उजाले में पढ़ना चाहिए,” पुष्पा कहती हैं। आठवीं कक्षा में पास होते ही पुष्पा ने जीआईसी अहमदपुर भेजने के लिए आए छोटे-छोटे रुपये एकत्र किए और आज का दिन संभव किया।

शिक्षा का संघर्ष और बुलिंग

गांव के साथी बच्चों ने रामकेवल का मज़ाक उड़ाया—“तुम्हारे गांव से कोई हाई स्कूल पास नहीं हुआ, तुम भी नहीं पास हो पाओगे।” ये शब्द उसके हौसले को झकझोरने के बजाय और मजबूत कर गए। “मैंने ठान लिया कि पास करके दिखाऊंगा, ताकि कोई कह न सके कि इस गांव में पढ़ाई का कोई नामोनिशान नहीं,” रामकेवल ने बताया।

शासन-प्रशासन का मान्यता–सम्मान

हाई स्कूल पास होते ही जिला मजिस्ट्रेट शशांक त्रिपाठी रामकेवल से मिले और सम्मान पत्र भेंट कर कहा,

“रामकेवल ने सिर्फ परीक्षा नहीं पास की, बल्कि गांव की शैक्षणिक परंपरा को नई दिशा दी है।”

प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक शैलेंद्र द्विवेदी ने बताया कि यहां से सन् 1926 से संचालित इस स्कूल में पासिंग रेट बेहद कम रहा, बावजूद इसके कभी भी हाई स्कूल स्तर तक छात्र नहीं बढ़े।

गांव की नई उम्मीद

रामकेवल की इस उपलब्धि ने पूरे गांव में उत्साह की लहर दौड़ा दी है। अब माता-पिता भी बच्चों को मजदूरी के बजाय पढ़ाई के लिए प्रेरित कर रहे हैं। पंचायत अध्यक्ष राजेश सिंह ने कहा,

“रामकेवल ने साबित कर दिया कि संकल्प और परिश्रम से कुछ भी असंभव नहीं। अब हम गांव में ट्यूशन क्लास़ और कंप्यूटर कोर्स शुरू कराने की योजना बना रहे हैं।”

समाज का संदेश

रामकेवल की कहानी यह दर्शाती है कि शिक्षा की रौशनी किसी अंधेरी गली में भी जगाई जा सकती है, अगर हो हौसला बुलंद और मिल रहा हो परिवार का साथ। आजाद भारत के सात दशकों में इस गांव में हाई स्कूल पास होने का दौर शुरू हो चुका है, और रामकेवल इसके पहले शख्स बनकर इतिहास में दर्ज हो गया।

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