मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाज कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक में जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों, वृद्धावस्था पेंशन, मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना और छात्रवृत्ति से जुड़े मामलों की समीक्षा की। बैठक में सर्वोदय विद्यालयों के संचालन को अधिक व्यवस्थित करने के लिए स्पष्ट नियमावली तैयार करने, शिक्षकों के रिक्त पदों पर चयन प्रक्रिया आगे बढ़ाने और एक सोसाइटी के गठन की दिशा में कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने विद्यालयों में शिक्षकों और अन्य आवश्यक कर्मचारियों की उपलब्धता, विद्यार्थियों को मिल रही सुविधाओं तथा प्रबंधन व्यवस्था की जानकारी ली। इसके साथ ही वृद्धावस्था पेंशन के लंबित आवेदनों के सत्यापन और पात्र लाभार्थियों को समयबद्ध तरीके से पेंशन का लाभ देने पर जोर दिया गया।
बैठक में मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना की स्थिति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के सभी 75 जिलों में 163 केंद्रों के माध्यम से योजना संचालित है, जहां 1,783 इम्पैनल्ड शिक्षक जुड़े हैं। इन केंद्रों पर यूपीएससी, पीसीएस, नीट, जेईई, एनडीए और सीडीएस सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए 23,801 विद्यार्थी पंजीकृत हैं।
छात्रवृत्ति की समीक्षा के दौरान विभिन्न कारणों से लाभ से वंचित रह गए लगभग 3.16 लाख विद्यार्थियों को दोबारा अवसर देने की व्यवस्था की जा रही है। मुख्यमंत्री ने आवेदन प्रक्रिया को समय से शुरू करने और पात्र विद्यार्थियों को निर्धारित समयसीमा में छात्रवृत्ति की राशि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में 93 जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय संचालित थे। वर्ष 2025-26 तक इनकी संख्या बढ़कर 103 हो गई है। इन 103 विद्यालयों में 59 विद्यालय केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से और 44 विद्यालय उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद से संबद्ध बताए गए। समीक्षा के दौरान विद्यालयों में शिक्षकों और अन्य जरूरी मानव संसाधन की उपलब्धता का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया।
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मुख्यमंत्री ने शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। साथ ही विद्यार्थियों की शैक्षणिक जरूरतों के अनुसार अन्य आवश्यक कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया।
विद्यालयों के प्रबंधन और संचालन के लिए स्पष्ट व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया गया। इसके तहत विद्यालयों से जुड़ी सुस्पष्ट नियमावली तैयार करने और एक सोसाइटी के गठन की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
समीक्षा बैठक में राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना की स्थिति भी सामने रखी गई। बैठक में बताया गया कि योजना के तहत वर्ष 2017-18 में 37.47 लाख लाभार्थी थे, जिनकी संख्या वर्ष 2025-26 में बढ़कर 67.50 लाख हो गई।
वर्तमान में लगभग 11.50 लाख नए आवेदन लंबित बताए गए हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पेंशन के लिए पात्र लेकिन अब तक लाभ से वंचित वृद्धजनों के आवेदनों का सत्यापन कराया जाए और पात्र लाभार्थियों को जल्द पेंशन से जोड़ा जाए।
उन्होंने आवेदन के सत्यापन से लेकर पेंशन स्वीकृति तक की प्रक्रिया समयबद्ध रखने पर जोर दिया। निर्देशों का उद्देश्य पात्र आवेदकों को अनावश्यक रूप से प्रतीक्षा से बचाना बताया गया। बैठक में लंबित आवेदनों के निस्तारण के लिए सत्यापन और स्वीकृति की प्रक्रिया को प्राथमिकता देने की बात कही गई।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए संचालित मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना की भी बैठक में समीक्षा हुई। अधिकारियों के अनुसार योजना प्रदेश के सभी 75 जिलों में 163 केंद्रों के माध्यम से संचालित है। इन केंद्रों पर 1,783 इम्पैनल्ड शिक्षक उपलब्ध हैं। विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे 23,801 विद्यार्थियों का पंजीकरण इन केंद्रों पर बताया गया।
योजना के तहत यूपीएससी, पीसीएस, नीट, जेईई, एनडीए और सीडीएस जैसी परीक्षाओं की तैयारी कराई जा रही है। इसके अलावा चार सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी संचालित किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन उपलब्ध कराने पर जोर दिया। उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ श्रेष्ठ शिक्षकों और विशेषज्ञों के अनुभव का अधिक से अधिक विद्यार्थियों तक लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए गए। बैठक में योजना की पहुंच और प्रभावशीलता को और बढ़ाने से जुड़े पहलुओं पर भी चर्चा की गई।
समाज कल्याण विभाग की समीक्षा के दौरान छात्रवृत्ति वितरण की अद्यतन स्थिति भी सामने रखी गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक पात्र विद्यार्थी को समय पर छात्रवृत्ति का लाभ मिलना चाहिए। इसके लिए पूर्वदशम और दशमोत्तर छात्रवृत्ति से वंचित विद्यार्थियों के लिए आवेदन पोर्टल तत्काल खोलने के निर्देश दिए गए।
समीक्षा में बताया गया कि विभिन्न कारणों से लगभग 3.16 लाख विद्यार्थी छात्रवृत्ति से वंचित रह गए हैं। इन्हें दोबारा आवेदन का अवसर देने की व्यवस्था की जा रही है। इन विद्यार्थियों में 31,836 शासकीय संस्थानों के, 69,631 अनुदानित संस्थानों के तथा 2,46,426 निजी संस्थानों के विद्यार्थी शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने छात्रवृत्ति वितरण से जुड़ी तकनीकी और प्रक्रियागत समस्याओं का त्वरित समाधान करने के निर्देश दिए। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि पात्र विद्यार्थी केवल प्रक्रिया संबंधी अड़चनों के कारण लाभ से वंचित न रहें।
छात्रवृत्ति की समीक्षा के दौरान समयसीमा पर भी विशेष जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पात्र विद्यार्थियों को हर हाल में 2 अक्टूबर तक छात्रवृत्ति की धनराशि अंतरित कर दी जाए।
इसके लिए आवेदन पोर्टल खोलने, वंचित विद्यार्थियों को फिर अवसर देने और तकनीकी अथवा प्रक्रियागत कठिनाइयों को दूर करने की कार्रवाई को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए। बैठक में छात्रवृत्ति वितरण की प्रक्रिया को पात्रता के आधार पर समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर जोर दिया गया।
समीक्षा बैठक में समाज कल्याण विभाग से जुड़े कई महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए। जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों की संख्या वर्ष 2017 से पहले के 93 से बढ़कर वर्ष 2025-26 में 103 हो गई है।
राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के लाभार्थियों की संख्या भी वर्ष 2017-18 के 37.47 लाख से बढ़कर वर्ष 2025-26 में 67.50 लाख बताई गई। इसके बावजूद करीब 11.50 लाख नए आवेदन अभी लंबित हैं।
मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों में 163 केंद्र संचालित होने की जानकारी दी गई। इन केंद्रों से 23,801 विद्यार्थी जुड़े हैं और 1,783 इम्पैनल्ड शिक्षक उपलब्ध हैं।
वहीं छात्रवृत्ति से वंचित लगभग 3.16 लाख विद्यार्थियों को फिर से आवेदन का अवसर देने की व्यवस्था की जा रही है। इनमें शासकीय, अनुदानित और निजी संस्थानों के विद्यार्थी शामिल हैं।
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