पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार करते हुए कहा कि वे वास्तव में चुनाव नहीं हारी हैं। उनके इस बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ बताया है।
चुनाव परिणामों के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 207 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जिससे लगभग 15 वर्षों से चल रहा टीएमसी का शासन समाप्त हो गया। ममता बनर्जी ने चुनाव परिणामों को खारिज करते हुए इसे “जनादेश नहीं बल्कि एक साजिश” करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया और मतगणना के दौरान व्यापक अनियमितताएं हुईं।
उन्होंने कहा कि लगभग 100 सीटों पर मतों की “लूट” हुई और मतगणना को जानबूझकर धीमा किया गया। उनका दावा है कि उनकी लड़ाई भाजपा से अधिक इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया से थी, जिस पर उन्होंने पक्षपात के आरोप लगाए। ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि वे लोकभवन जाकर इस्तीफा नहीं देंगी, क्योंकि उनके अनुसार हम हारे नहीं हैं।
ममता के बयान पर भाजपा नेता संबित पात्रा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे “चिंताजनक और हास्यास्पद” बताते हुए कहा कि भारत की पहचान एक मजबूत लोकतंत्र के रूप में है और इस तरह के बयान संविधान की भावना के खिलाफ हैं।
संबित पात्रा ने बी आर आंबेडकर का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय लोकतंत्र में कोई भी नेता अपरिहार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनाव परिणामों का सम्मान करना हर जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है और सत्ता का हस्तांतरण संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हार स्वीकार न करना “तानाशाही प्रवृत्ति” को दर्शाता है और यह लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत है।
ममता बनर्जी ने संकेत दिया कि वे अब राष्ट्रीय राजनीति पर अधिक ध्यान देंगी और विपक्षी गठबंधन INDIA को मजबूत करने की दिशा में काम करेंगी। उन्होंने बताया कि सोनिआ गाँधी, राहुल गाँधी, अरविन्द केजरीवाल, उद्धव ठाकरे, अखिलेश यादव और हेमंत सोरेन ने उनसे संपर्क कर समर्थन जताया है। इसके साथ ही उन्होंने आंदोलनकारी रुख अपनाने का ऐलान करते हुए कहा कि अब वे सड़कों पर उतरकर लड़ाई लड़ेंगी।
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