देश के उच्च संवैधानिक पदों में से एक उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का अचानक इस्तीफा न केवल चौंकाने वाला है बल्कि संसद की राजनीति को एक बार फिर सवालों के घेरे में ला खड़ा करता है। जब पूरा देश मानसून सत्र में होने वाले अहम विधायी चर्चाओं की ओर देख रहा था, तब उपराष्ट्रपति का स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अचानक पद छोड़ देना राजनीति में कई संभावित संकेतों की ओर इशारा करता है।
इस इस्तीफे ने विपक्ष को सरकार से जवाब मांगने का मौका दे दिया है। सबसे मुखर प्रतिक्रिया समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की रही, जिन्होंने प्रेस से बातचीत में कहा, "अगर इस्तीफे के पीछे स्वास्थ्य कारण हैं, तो चिंता की बात है। इस उम्र में स्वास्थ्य को लेकर सभी को सावधान रहना चाहिए।"
क्या यह सिर्फ स्वास्थ्य का मामला है?
अखिलेश यादव के चाचा और सपा के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने भी संदेह जताया, "हम तो सिर्फ वही जानते हैं जो इस्तीफे में लिखा है। पर्दे के पीछे क्या चल रहा है, यह कहना मुश्किल है।"
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने भी चौंकाने वाली प्रतिक्रिया दी,"कल तक तो ऐसा नहीं लग रहा था कि वो बीमार हैं। जब रात को खबर मिली तो मैं स्तब्ध रह गया।"
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा, "धनखड़ जैसे जुझारू और तर्कशील व्यक्ति, जो बीमार होने पर भी सदन में सक्रिय रहते थे, उनका स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा सामान्य नहीं लगता। सरकार की चुप्पी बेहद अस्वाभाविक है।"
वहीं, निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने इसे सीधा “घपला” बताते हुए कहा, "अगर स्वास्थ्य कारण होते तो इस्तीफा दो दिन पहले या बाद में होता। यहां कुछ और ही चल रहा है। ‘कहीं पे निगाहें, कहीं पे निशाना’ जैसा लग रहा है।"
राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह की टिप्पणी सबसे अहम रही। उन्होंने बताया, "मैंने कल शाम 5:30 बजे उनसे मुलाकात की थी, वो अच्छे मूड में थे। उन्हें बस बहस की चिंता थी कि सदन शांतिपूर्वक चले। उनका इस्तीफा बेहद चौंकाने वाला है। सरकार को हस्तक्षेप कर उन्हें वापस लाना चाहिए।"
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