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यूपी विधानसभा में इस बार हंगामे से पहले बनी सहमति, जानिए सर्वदलीय बैठक में क्या तय हुआ

चार दिवसीय मानसून सत्र से पहले विधानसभा अध्यक्ष की अध्यक्षता में हुई बैठक, सरकार और विपक्ष ने जनहित के मुद्दों पर शांतिपूर्ण व सार्थक चर्चा के लिए जताई सहमति
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Bureau News Desk
02 Aug 2026
03:57 PM
1 min read
यूपी विधानसभा में इस बार हंगामे से पहले बनी सहमति, जानिए सर्वदलीय बैठक में क्या तय हुआ
हाइलाइट्स
सोमवार से शुरू होगा उत्तर प्रदेश विधानसभा का चार दिवसीय मानसून सत्र।
सत्र से पहले विधानसभा अध्यक्ष की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक हुई।
सत्ता और विपक्ष ने सदन की गरिमा बनाए रखने और मुद्दों पर चर्चा पर सहमति जताई।
सरकार विधायी और वित्तीय कार्य पेश करने की तैयारी में है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा का चार दिवसीय मानसून सत्र सोमवार से शुरू होने जा रहा है। इससे एक दिन पहले रविवार को विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना की अध्यक्षता में आयोजित सर्वदलीय बैठक में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सदन की कार्यवाही को शांतिपूर्ण, गरिमापूर्ण और लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप संचालित करने पर सहमति बनी। बैठक में सभी दलों ने जनहित से जुड़े मुद्दों पर सार्थक चर्चा की आवश्यकता पर जोर दिया।

बैठक ऐसे समय में हुई है जब मानसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच कई अहम मुद्दों पर तीखी बहस की संभावना जताई जा रही है। हालांकि सर्वदलीय बैठक के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सदन की कार्यवाही लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप संचालित की जाएगी।

सर्वदलीय बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना, कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद और ओमप्रकाश राजभर समेत सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री शामिल हुए।

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वहीं विपक्ष की ओर से नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय, लोकदल के नेता राजपाल बालियान, कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा 'मोना' और जनसत्ता दल के नेता कुंवर रघुराज प्रताप सिंह (राजा भैया) ने बैठक में भाग लिया।

बैठक के दौरान विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सभी दलों से सदन की गरिमा बनाए रखने और जनहित से जुड़े विषयों पर सकारात्मक चर्चा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वस्थ संवाद और रचनात्मक बहस ही विधानसभा की प्रभावी कार्यप्रणाली का आधार है।

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सर्वदलीय बैठक के बाद कार्यमंत्रणा समिति की बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें चार दिवसीय मानसून सत्र की कार्यवाही का प्रारूप तय किया गया। सरकार की ओर से विभिन्न विधायी और वित्तीय कार्य सदन के पटल पर रखे जाने की तैयारी की गई है। दूसरी ओर विपक्ष ने संकेत दिए हैं कि वह महंगाई, कानून-व्यवस्था, शिक्षा, किसानों और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को सत्र के दौरान प्रमुखता से उठाएगा।

मानसून सत्र के दौरान सरकार की विधायी प्राथमिकताओं और विपक्ष द्वारा उठाए जाने वाले जनहित के मुद्दों के बीच विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। राजनीतिक दलों की रणनीतियां भले अलग हों, लेकिन सर्वदलीय बैठक में सदन के सुचारु संचालन को लेकर बनी सहमति ने सत्र शुरू होने से पहले एक सकारात्मक संकेत दिया है।

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