उत्तर प्रदेश में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में प्रदेश में चीनी के उत्पादन, उपलब्ध स्टॉक, मिलों से बाजार तक आपूर्ति और कीमतों की स्थिति की समीक्षा की गई। सरकार के अनुसार प्रदेश में चीनी की उपलब्धता पर्याप्त है, जबकि बाजार में कीमतों में तेजी को देखते हुए स्टॉक और आपूर्ति व्यवस्था की निगरानी बढ़ाई जा रही है।
सरकार की समीक्षा में सामने आया कि प्रदेश की चीनी मिलों में करीब 179.38 लाख क्विंटल चीनी का स्टॉक उपलब्ध है। इसके अलावा जून और जुलाई के दौरान करीब 235 लाख क्विंटल चीनी बाजार में बेची जा चुकी है। इन आंकड़ों के बावजूद बाजार में कीमतों में तेजी को देखते हुए प्रशासन अब चीनी मिलों, थोक कारोबारियों, गोदामों और बड़े उपभोक्ताओं के स्टॉक की जांच कर रहा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों में कुल 179.38 लाख क्विंटल चीनी उपलब्ध है। इसमें निजी चीनी मिलों के पास सबसे ज्यादा स्टॉक है। आंकड़ों के मुताबिक:
- निजी चीनी मिलें: 150.50 लाख क्विंटल
- सहकारी चीनी मिलें: 23.60 लाख क्विंटल
- निगम की चीनी मिलें: 5.28 लाख क्विंटल
- कुल स्टॉक: 179.38 लाख क्विंटल
सरकार के अनुसार जून और जुलाई में मिलों की ओर से करीब 235 लाख क्विंटल चीनी बाजार में बेची गई। समीक्षा के दौरान इन आंकड़ों को चीनी की मौजूदा उपलब्धता के आकलन के आधार के रूप में देखा गया।
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चीनी की पर्याप्त उपलब्धता के सरकारी आंकड़ों के बावजूद बाजार में कीमत बढ़ने को लेकर प्रशासन ने अब आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी तेज कर दी है। जांच का दायरा केवल चीनी मिलों में मौजूद स्टॉक तक सीमित नहीं रहेगा।
प्रशासन यह भी देखेगा कि मिलों से निकलने के बाद चीनी किन कारोबारियों तक पहुंची, कितनी मात्रा में पहुंची और वह किस कीमत पर आगे बेची गई। इस प्रक्रिया के तहत मिल, थोक व्यापारी, गोदाम और बड़े उपभोक्ताओं के बीच स्टॉक की आवाजाही की जानकारी जुटाई जा रही है।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि चीनी की कमी को लेकर अफवाहों पर नजर रखी जा रही है। उपभोक्ताओं से जरूरत से अधिक खरीदारी न करने की अपील की गई है।
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जमाखोरी रोकने के लिए अधिकृत चीनी डीलरों और थोक कारोबारियों के स्टॉक पर सीमा लागू है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार किसी डीलर के पास 30 दिन से अधिक की आवश्यकता का स्टॉक नहीं होना चाहिए।
इसके साथ ही किसी भी स्थान पर 4000 क्विंटल यानी 400 टन से अधिक चीनी रखने पर रोक है। इस व्यवस्था के तहत प्रशासन यह जांच करेगा कि किसी व्यापारी या डीलर ने निर्धारित सीमा के मुकाबले अधिक स्टॉक तो नहीं रखा है। जांच के दौरान कागजी रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच अंतर भी देखा जाएगा।
सरकार ने बड़ी मात्रा में चीनी इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं को भी निगरानी के दायरे में रखा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिन उपभोक्ताओं की मासिक चीनी खपत 10 टन या उससे अधिक है, वे 15 दिन की खपत से अधिक स्टॉक नहीं रख सकते। इस श्रेणी में बड़ी मिठाई इकाइयां, कन्फेक्शनरी उद्योग, पेय पदार्थ बनाने वाली इकाइयां, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां और अन्य संस्थागत खरीदार शामिल हो सकते हैं। प्रशासन इन इकाइयों के स्टॉक की स्थिति की भी जांच कर सकता है, ताकि बाजार में उपलब्ध चीनी के वितरण और भंडारण की स्थिति का आकलन किया जा सके।
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद जिलों में प्रशासनिक कार्रवाई तेज की गई है। थोक व्यापारियों के गोदामों की जांच, स्टॉक रजिस्टर का मिलान और मौके पर मौजूद वास्तविक स्टॉक का सत्यापन किया जा रहा है।
बागपत में प्रशासन और खाद्य आपूर्ति विभाग की टीमों ने गोदामों और चीनी के स्टॉक की जांच शुरू की है। बरेली और गौतमबुद्धनगर में भी बाजार की निगरानी बढ़ाए जाने की जानकारी दी गई है। गौतमबुद्धनगर में तहसील और क्षेत्र स्तर पर टीमों के माध्यम से स्टॉक और बाजार भाव की निगरानी की व्यवस्था की गई है।
जांच के दौरान प्रशासन यह देखेगा कि किसी व्यापारी ने कितनी चीनी खरीदी, कितनी मात्रा में बिक्री की और कितना स्टॉक गोदाम में शेष है। इसके बाद दस्तावेजों में दर्ज मात्रा का मौके पर मौजूद चीनी से मिलान किया जाएगा। रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में अंतर मिलने पर संबंधित मामले की जांच की जाएगी। इसी तरह बाजार में निर्धारित कीमत से अधिक दर पर बिक्री की शिकायत मिलने पर भी संबंधित व्यापारी के कारोबार और स्टॉक की जांच की जा सकती है।
सरकार ने स्टॉक सीमा और बाजार में कृत्रिम कमी से संबंधित मामलों में सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार स्टॉक सीमा का उल्लंघन, छिपाकर स्टॉक रखना या कृत्रिम कमी पैदा कर कीमत बढ़ाने की कोशिश पाए जाने पर आवश्यक वस्तु अधिनियम और लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज करने और जेल तक की कार्रवाई का प्रावधान लागू किया जा सकता है।
इसका अर्थ है कि प्रशासन की निगरानी में सिर्फ गोदाम में मौजूद चीनी की मात्रा ही नहीं, बल्कि स्टॉक रखने की अवधि, खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड और बाजार में इसकी आपूर्ति भी शामिल होगी।
बाजार में चीनी की वास्तविक उपलब्धता का आकलन करने के लिए चीनी मिलों से बिक्री का विवरण भी लिया जा रहा है। प्रशासन यह जानकारी जुटा रहा है कि मिलों से निकलने वाली चीनी किन खरीदारों तक पहुंचती है।
मिल से निकलने के बाद यदि किसी स्तर पर आपूर्ति में रुकावट दिखाई देती है, तो उस हिस्से की जांच की जा सकती है। सरकार का लक्ष्य चीनी की नियमित आपूर्ति बनाए रखना और बाजार में अनावश्यक दबाव की स्थिति को रोकना है।
चीनी की कीमतों और आपूर्ति की समीक्षा के साथ राज्य सरकार ने गन्ना किसानों के भुगतान की स्थिति की जानकारी भी सामने रखी है। सरकार के अनुसार करीब 48 लाख किसानों के लिए 3,217 करोड़ रुपये का गन्ना भुगतान जारी किया गया है। राज्य सरकार इस भुगतान को चीनी उद्योग की आपूर्ति व्यवस्था और आगामी पेराई सत्र की तैयारियों से जोड़कर देख रही है। गन्ना किसानों को समय पर भुगतान मिलने और अगले पेराई सत्र की तैयारियों के बीच चीनी उद्योग की पूरी श्रृंखला को सुचारु रखने पर जोर दिया जा रहा है।
आगामी त्योहारों के दौरान चीनी की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए सरकार ने नए पेराई सत्र की तैयारियां तेज करने के निर्देश दिए हैं। सरकार की योजना के अनुसार जरूरत के आधार पर इस बार 15 अक्टूबर से नया पेराई सत्र शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इसका उद्देश्य नई चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और त्योहारों के दौरान बाजार की मांग के अनुरूप आपूर्ति बनाए रखना है।
आने वाले समय में दशहरा और दीपावली जैसे त्योहार हैं। इन अवसरों पर मिठाइयों और अन्य खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ती है, जिससे चीनी की खपत भी बढ़ सकती है।
इसी वजह से प्रशासन ने त्योहारों से पहले ही बाजार और गोदामों में उपलब्ध स्टॉक की जांच तेज की है। अधिकारियों का ध्यान यह सुनिश्चित करने पर है कि निर्धारित सीमा से अधिक मात्रा में चीनी लंबे समय तक रोककर न रखी जाए।
सरकार ने आम उपभोक्ताओं से चीनी की कमी से जुड़ी अफवाहों पर भरोसा न करने और जरूरत से अधिक खरीदारी से बचने की अपील की है। सरकार के अनुसार प्रदेश में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। ऐसे में एक साथ बड़ी मात्रा में खरीदारी होने पर बाजार की मांग अचानक बढ़ सकती है। इसी पृष्ठभूमि में उपभोक्ताओं से सामान्य जरूरत के अनुसार ही खरीदारी करने को कहा गया है।
चीनी के बढ़ते दाम के बीच सरकार की निगरानी व्यवस्था को तीन प्रमुख स्तरों में देखा जा सकता है।
पहला, चीनी मिलें:
मिलों में मौजूद स्टॉक और बाजार में की गई बिक्री की निगरानी।
दूसरा, थोक व्यापारी:
30 दिन की जरूरत और 4000 क्विंटल की अधिकतम स्टॉक सीमा का पालन।
तीसरा, बड़े उपभोक्ता:
मासिक 10 टन या उससे अधिक खपत करने वाले उपभोक्ताओं के लिए 15 दिन की खपत से अधिक स्टॉक पर निगरानी।
इसके साथ ही जिलों में गोदाम जांच, स्टॉक रजिस्टर का सत्यापन और बाजार भाव की निगरानी की जा रही है।
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