>उत्तर प्रदेश के निर्यातकों के लिए अमेरिका के 50 प्रतिशत टैरिफ एक चुनौती बनकर सामने आया है, लेकिन इसी चुनौती ने नए अवसरों के द्वार भी खोल दिए हैं। अब यूपी के निर्यातकों की निगाहें यूरोप पर टिकी हैं। भारत-यूरोपियन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) लागू होने के बाद स्विट्जरलैंड, नॉर्वे और आयरलैंड जैसे देशों में उत्तर प्रदेश के उत्पादों की खासी मांग बढ़ने की उम्मीद है।
>फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (FIEO) की रिपोर्ट बताती है कि यूपी से अमेरिका को सबसे अधिक चर्म उत्पाद, कालीन, कांच, रेडीमेड गारमेंट्स, फुटवियर, इंजीनियरिंग गुड्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, फर्नीचर और जेम्स-ज्वेलरी का निर्यात किया जाता है। अकेले पिछले वित्तीय वर्ष में ही यूपी ने अमेरिका को 35,545 करोड़ रुपये के उत्पादों का निर्यात किया। लेकिन अमेरिकी टैरिफ ने इस सप्लाई चेन पर असर डालना शुरू कर दिया है।
>ऐसे में निर्यातकों ने यूरोपीय बाजारों की ओर रुख करना शुरू कर दिया है। नई नीति के तहत अक्टूबर से एफटीए लागू होते ही यूरोपीय देशों में यूपी के उत्पादों को टैरिफ छूट का लाभ मिलेगा। यही वजह है कि आगरा, कानपुर, भदोही और मुरादाबाद जैसे निर्यात हब पहले से ही यूरोपीय बाजारों की जरूरतों का अध्ययन कर रहे हैं।
>राज्य सरकार ने भी निर्यातकों की राय लेकर नई निर्यात नीति का मसौदा तैयार किया है। इसमें विशेष रियायतें, सब्सिडी और प्रक्रियागत सुधारों को शामिल किया जा रहा है। सरकार की योजना है कि यूरोप के अलावा रूस और यूके में भी यूपी के फुटवियर, लेदर और "वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट" (ODOP) आइटम्स के निर्यात को बढ़ावा दिया जाए।
>फुटवियर एवं चमड़ा उद्योग विकास परिषद के अध्यक्ष पूरन डावर का कहना है कि यूरोप यूपी के निर्यातकों के लिए सुनहरा अवसर बन सकता है। लेदर, फुटवियर और ओडीओपी उत्पादों की यूरोप में पहले से ही मजबूत मांग है। यदि राज्य सरकार आवश्यक सहयोग देती है तो यूपी का निर्यात कई गुना तक बढ़ सकता है।
>अमेरिकी टैरिफ की मार झेल रहे यूपी के निर्यातकों के लिए यूरोप का द्वार खुलना न केवल आर्थिक मजबूती देगा बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में प्रदेश की साख भी बढ़ाएगा।
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