107 MLA के समर्थन के बावजूद विजय के CM बनने पर अटका मामला, राज्यपाल ने मांगा 118 का आंकड़ा

तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर बढ़ी राजनीतिक हलचल, सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद टीवीके बहुमत से दूर। जानिए संविधान क्या कहता है और आगे क्या हो सकता है।
Bureau 07 May 2026, 09:28 PM 1 min read
107 MLA के समर्थन के बावजूद विजय के CM बनने पर अटका मामला, राज्यपाल ने मांगा 118 का आंकड़ा

 

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य में सरकार गठन को लेकर राजनीतिक असमंजस की स्थिति बन गई है। अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी टीवीके 234 सदस्यीय विधानसभा में 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन स्पष्ट बहुमत के लिए जरूरी 118 विधायकों के आंकड़े तक अभी नहीं पहुंच पाई है। इसी कारण राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने विजय को सरकार गठन के लिए पर्याप्त समर्थन जुटाने को कहा है।

 

टीवीके को कांग्रेस के पांच विधायकों का समर्थन मिलने के बाद भी पार्टी बहुमत से कुछ सीटें पीछे है। ऐसे में विजय की नजर अब वामपंथी दलों, वीसीके और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग जैसे दलों पर टिकी हुई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इन दलों से समर्थन को लेकर बातचीत जारी है और अगले दो दिनों में स्थिति साफ हो सकती है।

 

सरकार गठन को लेकर चेन्नई में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। टीवीके नेताओं ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं से मुलाकात कर समर्थन मांगा है। वहीं वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने संकेत दिए हैं कि उनकी पार्टी वाम दलों के रुख के बाद ही कोई अंतिम फैसला करेगी।

 

दूसरी ओर कांग्रेस, वाम दलों और वीसीके ने राज्यपाल के रुख पर सवाल उठाए हैं। इन दलों का कहना है कि विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते विजय को पहले सरकार बनाने का अवसर मिलना चाहिए। उनका तर्क है कि संवैधानिक परंपराओं के अनुसार राज्यपाल पहले सबसे बड़े दल या गठबंधन को बहुमत साबित करने का मौका देते हैं।

 

इधर, एम के स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके ने अपने सहयोगी दलों से गठबंधन में एकजुट रहने की अपील की है। हालांकि डीएमके ने सीधे तौर पर सरकार गठन के दावे को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन राजनीतिक हलकों में संभावित नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हैं।

 

भारतीय जनता पार्टी ने इस पूरे घटनाक्रम पर कहा है कि राज्यपाल संविधान और स्थापित नियमों के तहत ही निर्णय लेंगे। भाजपा नेताओं का कहना है कि किसी भी दल को सरकार बनाने के लिए सदन में स्पष्ट बहुमत साबित करना अनिवार्य है और राज्यपाल की भूमिका पूरी तरह संवैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप है।

 

संवैधानिक विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी स्थिति में राज्यपाल के पास यह अधिकार होता है कि वह सबसे बड़े दल को पहले सरकार बनाने का न्योता दें और निश्चित समय सीमा के भीतर बहुमत साबित करने को कहें। हालांकि यदि किसी दल के पास समर्थन के पर्याप्त दस्तावेज नहीं हों, तो राज्यपाल अतिरिक्त समर्थन का स्पष्ट प्रमाण मांग सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों में भी फ्लोर टेस्ट को बहुमत साबित करने का सबसे उचित तरीका माना गया है।

 

 

तमिलनाडु की राजनीति फिलहाल अनिश्चितता के दौर में है। अब नजर इस बात पर टिकी है कि विजय बहुमत के लिए आवश्यक समर्थन जुटा पाते हैं या राज्य में नए राजनीतिक गठबंधन उभरते हैं।

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