पूर्वांचल में सपा का नया दांव: सीमा राजभर बनीं महिला सभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष

यूपी राजनीति में बड़ा बदलाव - सपा ने सीमा राजभर को महिला सभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया। 2027 चुनाव से पहले पूर्वांचल में नई रणनीति।
Bureau 21 Apr 2026, 05:24 PM 1 min read
पूर्वांचल में सपा का नया दांव: सीमा राजभर बनीं महिला सभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष

उत्तर प्रदेश की राजनीति में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने संगठनात्मक स्तर पर बड़ा बदलाव किया है। पार्टी ने पूर्वांचल क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने के उद्देश्य से सीमा राजभर उर्फ भावना को महिला सभा का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया है।  समाजवादी पार्टी की महिला इकाई में यह बदलाव अहम माना जा रहा है। अब तक इस पद पर जूही सिंह कार्यरत थीं, जिन्हें वर्ष 2023 में यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। पार्टी नेतृत्व ने संकेत दिया है कि जूही सिंह को संगठन में नई भूमिका दी जाएगी। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 21 अप्रैल 2026 को इस बदलाव की जानकारी देते हुए कहा कि संगठन को मजबूत करने के लिए यह निर्णय लिया गया है।

 

बलिया निवासी सीमा राजभर पूर्व में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी से भी जुड़ी रही हैं। राजनीतिक रूप से सक्रिय रही सीमा राजभर ने कई मौकों पर ओम प्रकाश राजभर और उनकी पार्टी पर आरोप लगाए हैं। विश्लेषकों के अनुसार, पूर्वांचल में राजभर समुदाय के प्रभाव को देखते हुए सपा का यह कदम सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। 

 

सीमा राजभर की नियुक्ति पर जूही सिंह ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पार्टी को विश्वास है कि अखिलेश यादव के नेतृत्व में 2027 में उत्तर प्रदेश में सपा सरकार बनाने में सफलता मिलेगी। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के नेता ओम प्रकाश राजभर वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा के सहयोगी थे, लेकिन बाद में उन्होंने गठबंधन तोड़कर भारतीय जनता पार्टी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का साथ दिया। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्हें योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया।

 

जहूराबाद से विधायक ओम प्रकाश राजभर का दावा रहा है कि 2022 के चुनाव में पूर्वांचल में सपा के बेहतर प्रदर्शन में उनकी भूमिका अहम थी, हालांकि सपा इन दावों से असहमत रही है। सपा की रणनीति पूर्वांचल में अपने प्रदर्शन को बरकरार रखने और विस्तार देने पर केंद्रित दिखाई दे रही है। पार्टी को उम्मीद है कि 2022 विधानसभा और 2024 लोकसभा चुनावों में मिले समर्थन को 2027 तक बनाए रखा जा सकेगा।

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