हाल के महीनों में शेयर बाजार में बढ़ती अस्थिरता का असर निवेशकों के व्यवहार पर साफ दिखने लगा है। एसआईपी जैसे लोकप्रिय निवेश माध्यम से बड़ी संख्या में लोग बाहर निकल रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि लंबे समय बाद पहली बार बंद होने वाली एसआईपी की संख्या नई शुरू होने वाली एसआईपी से अधिक हो गई है।
एसआईपी को आमतौर पर छोटे निवेशकों के लिए अनुशासित और दीर्घकालिक निवेश का प्रभावी तरीका माना जाता है। लेकिन बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव और कमजोर रिटर्न के कारण निवेशकों का भरोसा डगमगाने लगा है। पिछले कुछ समय से निवेशकों के पोर्टफोलियो पर नकारात्मक असर देखने को मिल रहा है, जिससे घबराहट में कई लोग अपने SIP निवेश को बंद कर रहे हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले 11 महीनों में पहली बार ऐसा हुआ है जब बंद या मैच्योर हुई SIP की संख्या नई SIP से ज्यादा रही।
- करीब 53.38 लाख SIP बंद या मैच्योर हुईं
- वहीं 52.82 लाख नई SIP शुरू की गईं
ये आंकड़े संकेत देते हैं कि निवेशकों के बीच अनिश्चितता और बाजार को लेकर असहजता बढ़ रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन हालिया अस्थिरता ने निवेशकों को मानसिक रूप से प्रभावित किया है।
- निवेश ऐप खोलने पर पोर्टफोलियो का “रेड” दिखना
- एक से दो साल की अवधि में कई फंड्स का नकारात्मक रिटर्न
- अल्पकालिक नुकसान से घबराहट
इन कारणों से निवेशक जल्दबाजी में SIP बंद करने का फैसला ले रहे हैं।
वित्तीय विशेषज्ञों के मुताबिक, हर स्थिति में SIP बंद करना सही कदम नहीं माना जाता। SIP का मूल उद्देश्य लंबी अवधि में बाजार के उतार-चढ़ाव को संतुलित करना होता है।
हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में SIP रोकना व्यावहारिक निर्णय हो सकता है:
- नौकरी छूट जाना या आय में अचानक कमी
- गंभीर आर्थिक संकट
- निवेश लक्ष्य पूरा हो जाना
इसके अलावा, यदि कोई फंड लगातार खराब प्रदर्शन कर रहा है, तो उसे बंद करने के बजाय दूसरे बेहतर फंड में स्थानांतरित करना अधिक उचित विकल्प माना जाता है।
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