>बिहार में कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की साझा रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपशब्द कहे जाने पर अब बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर न तो राहुल गांधी और न ही तेजस्वी यादव का नाम लिया, लेकिन अपने बयान से साफ संकेत दिए कि वह दोनों नेताओं की भाषा और राजनीतिक शैली से सहमत नहीं हैं।
>सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी बात रखते हुए मायावती ने लिखा कि देश में खासकर राजनीतिक स्वार्थ के कारण राजनीति का गिरता स्तर बेहद दुखद और चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि आज राजनीति संविधान और सिद्धांतों से भटककर व्यक्तिगत हमलों व अपशब्दों में उलझ चुकी है, जो देश व करोड़ों गरीबों और आमजन के हित में बिल्कुल नहीं है।
>पूर्व मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि देश की संवैधानिक संस्थाओं और उच्च पदों पर बैठे व्यक्तियों के खिलाफ अभद्र और अशोभनीय भाषा का प्रयोग देश की छवि को धूमिल करता है। चुनावी दौर में इस तरह की विषैली राजनीति और अधिक बढ़ जाती है, जिससे सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक माहौल पर नकारात्मक असर पड़ता है। मायावती ने दोहराया कि बहुजन समाज पार्टी शुरू से ही बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की विचारधारा और "सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय" की नीति पर चलती आई है। यही कारण है कि बसपा किसी भी तरह की दूषित और घृणित राजनीति से दूरी बनाए रखती है और अन्य दलों से भी यही अपेक्षा करती है कि वे देशहित को प्राथमिकता दें। बसपा प्रमुख ने अंत में कहा कि बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा बनाए गए भारतीय संविधान ने हर संस्था के लिए चेक एंड बैलेंस की व्यवस्था तय की है। यदि सभी राजनीतिक दल और संस्थाएं अपनी संवैधानिक मर्यादा में रहकर कार्य करें तो निश्चित ही देश का माहौल बिगड़ने से बचाया जा सकता है।
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