तेल की धार-जेब पर मार: 12 दिनों में पेट्रोल, CNG, दूध और सोना महंगा, आम आदमी का बिगड़ा बजट

लगातार बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई मिडिल क्लास की चिंता, ट्रांसपोर्ट से लेकर रसोई तक हर खर्च पर असर।
Bureau 26 May 2026, 01:40 PM 1 min read
तेल की धार-जेब पर मार: 12 दिनों में पेट्रोल, CNG, दूध और सोना महंगा, आम आदमी का बिगड़ा बजट

 

देश में पिछले करीब 12 दिनों के दौरान बढ़ती महंगाई ने आम आदमी की जेब पर सीधा असर डाला है। पेट्रोल-डीजल, सीएनजी, दूध, राशन और सोने-चांदी जैसी जरूरी वस्तुओं के दाम बढ़ने से घरेलू बजट प्रभावित हुआ है। बढ़ती कीमतों के कारण मिडिल क्लास परिवारों के मासिक खर्च में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। महंगाई का असर केवल ईंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि ट्रांसपोर्ट, खाद्य सामग्री और शादी-ब्याह से जुड़े खर्चों पर भी दिखाई देने लगा है। लगातार बढ़ते दामों के कारण लोगों की बचत और खर्च का संतुलन बिगड़ता नजर आ रहा है।

 

सीएनजी की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई परेशानी: पेट्रोल और डीजल की तुलना में सस्ता विकल्प मानी जाने वाली सीएनजी भी अब महंगी हो चुकी है। पिछले कुछ दिनों में सीएनजी की कीमतों में भी चार बार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कई शहरों में सीएनजी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। ऑटो और कैब चालकों का कहना है कि ईंधन पर खर्च लगातार बढ़ने से उनकी आय प्रभावित हो रही है। कुछ स्थानों पर किराया बढ़ाने की मांग भी सामने आने लगी है।

 

रसोई का बजट भी हुआ प्रभावित: महंगाई का असर घरेलू रसोई पर भी साफ दिखाई दे रहा है। कई दूध कंपनियों ने दूध के दाम बढ़ा दिए हैं। कुछ शहरों में दूध की कीमतों में प्रति लीटर 2 से 4 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा दाल, ब्रेड और अन्य खाद्य उत्पादों की कीमतों में भी इजाफा हुआ है। इससे दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर होने वाला खर्च बढ़ गया है। परिवारों का कहना है कि महीने का राशन बजट पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है।

 

सोना-चांदी की बढ़ती कीमतों से बढ़ी चिंता: शादी के सीजन के बीच सोना और चांदी की कीमतों में तेजी ने भी लोगों की चिंता बढ़ाई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी और आयात शुल्क के प्रभाव के चलते सोने के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। कई शहरों में सोना 1 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच गया है। मिडिल क्लास परिवारों के लिए शादी-ब्याह में सोने की खरीदारी अब पहले से ज्यादा महंगी होती जा रही है। 

 

ट्रांसपोर्ट महंगा होने से बढ़ रही वस्तुओं की कीमत: डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर माल ढुलाई पर भी पड़ रहा है। ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से फल, सब्जियां, राशन और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि देखने को मिल रही है। ट्रक ऑपरेटर्स का कहना है कि बढ़ती ईंधन लागत के कारण परिवहन खर्च लगातार बढ़ रहा है, जिसका असर बाजार कीमतों पर पड़ना शुरू हो गया है।

 

ईएमआई और बढ़ते खर्च के बीच दबाव में मिडिल क्लास: मिडिल क्लास परिवार इस समय दोहरे दबाव का सामना कर रहे हैं। एक तरफ घर और वाहन की ईएमआई, बच्चों की फीस और बिजली बिल जैसे स्थायी खर्च हैं, वहीं दूसरी तरफ रोजमर्रा की जरूरतों पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ रहा है। कई परिवारों का कहना है कि जिन पैसों में पहले पूरे महीने का खर्च चल जाता था, अब उसी राशि में बजट संभालना मुश्किल हो रहा है।

 

अंतरराष्ट्रीय बाजार पर टिकी राहत की उम्मीद: आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी नहीं आती, तब तक महंगाई से राहत मिलना कठिन हो सकता है। मिडिल ईस्ट में तनाव और डॉलर की मजबूती का असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर पड़ रहा है।

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