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बीच सड़क पर अचानक बंद हो रही थीं ई-रिक्शा और स्कूटर, सरकार ने 3 मोबाइल ऐप्स पर लगाया बैन

BAT-BMS, Lossigy और Epoch-i-ion ऐप्स के कथित दुरुपयोग के बाद कार्रवाई, सड़क सुरक्षा और ई-वाहन चालकों की आजीविका से जुड़ी शिकायतों पर सरकार का कदम
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Bureau News Desk
03 Jul 2026
03:25 PM
1 min read
बीच सड़क पर अचानक बंद हो रही थीं ई-रिक्शा और स्कूटर, सरकार ने 3 मोबाइल ऐप्स पर लगाया बैन
सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहन रिमोट से बंद करने वाले 3 ऐप्स पर लगाया बैन, इमेज सोर्स - एआई
हाइलाइट्स
सरकार ने BAT-BMS, Lossigy और Epoch-i-ion ऐप्स हटाने के निर्देश दिए।
आरोप है कि इन ऐप्स का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों को रिमोट से बंद करने में किया जा रहा था।
शिकायतों के अनुसार ई-रिक्शा और इलेक्ट्रिक स्कूटर बीच सड़क पर अचानक बंद हो रहे थे।
विशेषज्ञों ने सस्ते ईवी कंपोनेंट्स में कमजोर ब्लूटूथ सुरक्षा को बड़ी वजह बताया।

नई दिल्ली। इलेक्ट्रिक वाहनों को बीच सड़क पर रिमोट के जरिए बंद किए जाने की बढ़ती शिकायतों के बीच केंद्र सरकार ने तीन मोबाइल ऐप्स के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। सरकार ने BAT-BMS, Lossigy और Epoch-i-ion नामक मोबाइल एप्लिकेशन्स को हटाने के निर्देश जारी किए हैं। आरोप है कि इन ऐप्स का कथित तौर पर ई-रिक्शा, इलेक्ट्रिक स्कूटर और अन्य इलेक्ट्रिक वाहनों को दूर से डिसेबल करने के लिए दुरुपयोग किया जा रहा था।

सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, जिन अन्य मोबाइल ऐप्स का इसी तरह गलत इस्तेमाल किया जा रहा है, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। संबंधित ऐप्स को विभिन्न ऐप स्टोर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से हटाने की प्रक्रिया जल्द शुरू होने की संभावना है।

सरकार की यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब कई राज्यों से शिकायतें सामने आई थीं कि इलेक्ट्रिक वाहन चलते-चलते अचानक बंद हो जा रहे हैं। इससे न केवल सड़क पर दुर्घटना का खतरा बढ़ रहा था, बल्कि ई-रिक्शा और अन्य इलेक्ट्रिक वाहन चलाकर आजीविका कमाने वाले लोगों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा था। वाहन बीच रास्ते में रुकने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता था और कई मामलों में चालक लंबे समय तक वाहन दोबारा चालू नहीं कर पाते थे।

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बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम से जुड़े मोबाइल ऐप्स का उपयोग सामान्य तौर पर बैटरी की स्थिति की निगरानी, प्रदर्शन का विश्लेषण, डायग्नोस्टिक्स और तकनीकी सहायता जैसे कार्यों के लिए किया जाता है।

हालांकि, शिकायतों के अनुसार कुछ सस्ते आयातित या असेंबल किए गए इलेक्ट्रिक वाहन कंपोनेंट्स में ब्लूटूथ सुरक्षा पर्याप्त मजबूत नहीं थी। कई बैटरी सिस्टम में डिफॉल्ट पेयरिंग कोड जैसे '0000' या '1234' सक्रिय होने के कारण अनधिकृत लोग वाहन के बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम तक पहुंच बना लेते थे। इसके बाद संबंधित ऐप्स के माध्यम से वाहन को रिमोट से डिसेबल किए जाने की आशंका जताई गई।

साइबर सुरक्षा और इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल ऐप्स पर रोक तत्काल राहत देने वाला कदम हो सकता है, लेकिन इससे मूल समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं होगी।

विशेषज्ञों के अनुसार वास्तविक चुनौती उन बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम और हार्डवेयर में मौजूद सुरक्षा कमजोरियों की है, जिनका गलत फायदा उठाया जा सकता है। उनका मानना है कि वाहन निर्माताओं को मजबूत प्रमाणीकरण प्रणाली, सुरक्षित ब्लूटूथ प्रोटोकॉल और बेहतर साइबर सुरक्षा मानकों को अनिवार्य रूप से अपनाना चाहिए।

सूत्रों के अनुसार, सरकार केवल इन तीन ऐप्स तक सीमित नहीं रहेगी। यदि जांच में ऐसे अन्य मोबाइल एप्लिकेशन सामने आते हैं जिनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों को अनधिकृत तरीके से नियंत्रित करने या बंद करने के लिए किया जा रहा है, तो उनके खिलाफ भी इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी।

सरकार के फैसले पर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। कई उपयोगकर्ताओं ने इसे सार्वजनिक सुरक्षा और ई-वाहन चालकों के हित में जरूरी कदम बताया है। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि केवल ऐप्स पर कार्रवाई से समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं होगी। उन्होंने ईवी निर्माताओं के लिए कड़े साइबर सुरक्षा मानक लागू करने और ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी उठाई है।

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