60 साल पुराने गन्ना कानून में बदलाव की तैयारी, यूपी पर पड़ेगा सबसे बड़ा असर

एथनॉल को पहली बार मिलेगा स्पष्ट कानूनी ढांचा, डिजिटल निगरानी और नई फैक्ट्री मंजूरी प्रक्रिया शामिल।
Bureau 23 Apr 2026, 12:27 PM 1 min read
60 साल पुराने गन्ना कानून में बदलाव की तैयारी, यूपी पर पड़ेगा सबसे बड़ा असर

केंद्र सरकार ने गन्ना क्षेत्र से जुड़े लगभग छह दशक पुराने नियामक ढांचे में व्यापक बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाया है। वर्ष 1966 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में लागू गन्ना नियंत्रण आदेश को अब बदलने के लिए एक नया मसौदा तैयार किया गया है। इस प्रस्तावित ढांचे में एथनॉल उत्पादन, डिजिटल अनुपालन और चीनी मिलों की स्थापना के लिए औपचारिक अनुमति प्रणाली जैसे प्रावधानों को शामिल किया गया है। सरकार ने इस मसौदे पर 20 मई तक सुझाव आमंत्रित किए हैं।

 

इस बदलाव का सबसे अधिक प्रभाव उत्तर प्रदेश पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है, जिसे देश का चीनी का कटोरा कहा जाता है। राज्य की उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी, अनुकूल जलवायु और विकसित सिंचाई प्रणाली ने इसे गन्ना उत्पादन में अग्रणी बनाया है। अनुमानित आंकड़ों के अनुसार देश के कुल गन्ना उत्पादन का लगभग 40 से 50 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश से आता है। ऐसे में किसी भी नीतिगत बदलाव का सीधा असर यहां के किसानों, चीनी मिलों और संबंधित उद्योगों पर पड़ना तय माना जा रहा है।

 

प्रस्तावित गन्ना नियंत्रण आदेश 2026 में पुराने कानून की मूल संरचना को बरकरार रखा गया है, ताकि किसानों और उद्योग के बीच संतुलन बना रहे। इसमें उचित एवं लाभकारी मूल्य एफआरपी की व्यवस्था जारी रखने, गन्ने की आवाजाही पर नियंत्रण बनाए रखने, किसानों को 14 दिनों के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने और देरी की स्थिति में 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने जैसे प्रावधान शामिल हैं। हालांकि, इन पारंपरिक प्रावधानों के साथ-साथ बदलते औद्योगिक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण नए प्रावधान जोड़े गए हैं।

 

सबसे बड़ा बदलाव एथनॉल उत्पादन को लेकर किया गया है। अब तक गन्ना नियंत्रण आदेश में एथनॉल का स्पष्ट उल्लेख नहीं था, क्योंकि यह कानून उस समय बनाया गया था जब एथनॉल आधारित अर्थव्यवस्था विकसित नहीं हुई थी। नए मसौदे में चीनी मिल की परिभाषा का विस्तार करते हुए गन्ने के रस, सिरप, चीनी और शीरे से एथनॉल उत्पादन को भी शामिल किया गया है। इसके साथ ही उत्पादन की गणना के लिए एक मानक रूपांतरण फार्मूला प्रस्तावित किया गया है, जिसके अनुसार 600 लीटर एथनॉल को एक टन चीनी के बराबर माना जाएगा। यह प्रावधान उद्योग में पारदर्शिता और गणना की एकरूपता लाने के उद्देश्य से किया गया है।

 

इसके अलावा मसौदे में नई चीनी मिलों और संबंधित इकाइयों की स्थापना के लिए अधिक संरचित और औपचारिक प्रक्रिया का प्रस्ताव किया गया है। धारा 6ए से 6जी के तहत उद्योग स्थापित करने के लिए औद्योगिक उद्यम ज्ञापन (IEM) आधारित अनुमति प्रणाली लागू करने, मिलों के बीच न्यूनतम दूरी बनाए रखने, प्रदर्शन बैंक गारंटी को बढ़ाकर दो करोड़ रुपये करने और उत्पादन शुरू करने के लिए सख्त समयसीमा तय करने जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं। इन प्रावधानों का उद्देश्य अनियंत्रित विस्तार को रोकना और उद्योग में जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

 

मसौदे में केवल एथनॉल उत्पादन करने वाली उन इकाइयों को कुछ छूट देने का भी प्रावधान किया गया है, जो अपने परिसर में गन्ने की पेराई नहीं करती हैं। ऐसी इकाइयों को प्रदर्शन बैंक गारंटी की अनिवार्यता से राहत देने का प्रस्ताव है, जिससे देश में एथनॉल उत्पादन क्षमता को बढ़ावा मिल सके। इसे एक संतुलित नीतिगत कदम के रूप में देखा जा रहा है, जो एकीकृत चीनी-एथनॉल मिलों पर नियंत्रण बनाए रखते हुए स्वतंत्र एथनॉल इकाइयों को प्रोत्साहन देता है।

 

इसके साथ ही खांडसारी इकाइयों, जो पारंपरिक और छोटे स्तर की चीनी उत्पादन इकाइयां हैं, उन पर निगरानी को भी सख्त करने का प्रस्ताव रखा गया है। उद्योग संगठनों के अनुसार यह कदम बाजार में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

← Previous Story Next Story →

 

टिप्पणियाँ

टिप्पणी करने के लिए लॉगिन करें