>भारत में तेजी से बढ़ते ई-कॉमर्स सेक्टर पर अब सरकार की कड़ी नजर है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म्स कैश-ऑन-डिलीवरी (COD) ऑर्डर्स पर ग्राहकों से छिपे हुए एक्स्ट्रा चार्जेस वसूल रहे हैं। इन शुल्कों की जानकारी उपभोक्ताओं को चेकआउट पेज पर ही मिलती है, जिससे वे गुमराह महसूस करते हैं।
>केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शुक्रवार को इस मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि यह ई-कॉमर्स डार्क पैटर्न (E-Commerce Dark Pattern) का हिस्सा है, जो ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी और शोषण जैसा व्यवहार करता है। सरकार ने अब इसकी विस्तृत जांच शुरू कर दी है और उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन करने वाले प्लेटफॉर्म्स पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
>मंत्री ने बताया कि कंपनियां अक्सर ऑफर हैंडलिंग फीस, पेमेंट हैंडलिंग फीस और प्रोटेक्ट प्रॉमिस फीस जैसे नामों पर अतिरिक्त रकम जोड़ देती हैं। उपभोक्ताओं को यह शुल्क तब नजर आता है जब वे खरीदारी पूरी करने वाले होते हैं। इससे ग्राहकों का भरोसा टूटता है और पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।
>डार्क पैटर्न क्या है?
>डार्क पैटर्न एक ऐसी रणनीति है, जिसे ऑनलाइन कंपनियां जानबूझकर इस तरह डिजाइन करती हैं कि ग्राहक गुमराह हो जाएं।
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चेकआउट के समय छिपे चार्जेस दिखाना।
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कार्ट में चुपचाप अतिरिक्त प्रोडक्ट जोड़ देना।
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“Only one item left” या “Limited-time offer” जैसे दबाव बनाने वाले मैसेज दिखाना।
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सब्सक्रिप्शन लेने के लिए यूज़र को मजबूर करना।
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>ये तरीके ग्राहकों को मनोवैज्ञानिक रूप से प्रभावित कर खरीदारी कराने पर मजबूर करते हैं।
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The Department of Consumer Affairs has received complaints against e-commerce platforms charging extra for Cash-on-Delivery, a practice classified as a dark pattern that misleads and exploits consumers.
— Pralhad Joshi (@JoshiPralhad) October 3, 2025
A detailed investigation has been initiated and steps are being taken to… https://t.co/gEf5WClXJX
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>सरकार का बड़ा कदम
>भारत में पारदर्शी ई-कॉमर्स व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए सरकार अब इन भ्रामक तरीकों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने जा रही है। जांच पूरी होने के बाद दोषी कंपनियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी और उनका विश्वास डिजिटल मार्केट में और मजबूत होगा।
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