USA H-1B वीजा फीस बढ़ने से नहीं रुका करियर का सिलसिला, दो अमेरिकी कंपनियों ने चुने हिंदुस्तानी CEO

Corporate News: भारतीय टैलेंट ने फिर दिखाई शक्ति: दो अमेरिकी कंपनियों के नए CEO बने हिंदुस्तानी, H-1B फीस बढ़ने से नहीं रुकी उड़ान
News Desk 23 Sep 2025, 01:04 AM 1 min read
USA H-1B वीजा फीस बढ़ने से नहीं रुका करियर का सिलसिला, दो अमेरिकी कंपनियों ने चुने हिंदुस्तानी CEO


>भारतीय टैलेंट की दुनिया में काबिलियत की पहचान लगातार बनी हुई है। भले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने H-1B वीजा की फीस बढ़ा दी हो, लेकिन अमेरिका की बड़ी कंपनियां अब भी भारतीयों को शीर्ष पदों पर नियुक्त कर रही हैं। इसी कड़ी में हाल ही में दो प्रमुख अमेरिकी कंपनियों ने दो भारतीय अधिकारियों को CEO पद पर नियुक्त कर सबका ध्यान आकर्षित किया है।


>टी-मोबाइल का नया CEO: श्रीनिवास गोपालन
IIM अहमदाबाद के पूर्व छात्र श्रीनिवास 'श्रीनि' गोपालन ने टेलीकॉम क्षेत्र की दिग्गज अमेरिकी कंपनी टी-मोबाइल में CFO के पद से CEO का पद संभाला है। 1 नवंबर से वह कंपनी के नए CEO के रूप में कार्यभार संभालेंगे। इस अवसर पर श्रीनिवास ने LinkedIn पर आभार व्यक्त करते हुए कहा कि टी-मोबाइल का अगला CEO बनना उनके लिए गर्व का क्षण है।


>श्रीनिवास ने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान यूनिलीवर में मैनेजमेंट ट्रेनी के रूप में की थी। इसके बाद उन्होंने भारती एयरटेल, वोडाफोन, कैपिटल वन और डॉयचे टेलीकॉम जैसी कंपनियों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। टी-मोबाइल में उन्होंने टेक्नोलॉजी, कंज्यूमर और बिजनेस डिवीजन का संचालन करते हुए 5G, AI और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में अहम योगदान दिया है।


>मोल्सन कूर्स में राहुल गोयल बने CEO
इसी तरह, शिकागो बेस्ड बेवरेज कंपनी मोल्सन कूर्स ने 1 अक्टूबर से राहुल गोयल को नया प्रेसिडेंट और CEO नियुक्त किया है। 49 वर्षीय राहुल गोयल मूल रूप से भारत के मैसूर के रहने वाले हैं। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद बिजनेस के लिए अमेरिका के डेनवर में शिक्षा ग्रहण की। राहुल ने अमेरिका, ब्रिटेन और भारत में कई अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स के साथ महत्वपूर्ण योगदान दिया है। राहुल गोयल ने अपनी नई जिम्मेदारी को लेकर कहा कि वह कंपनी की विरासत को आगे बढ़ाते हुए चुनौतियों का सामना पूरी लगन से करेंगे।


>भारतीय टैलेंट की वैश्विक पहचान
श्रीनिवास और राहुल ही नहीं, बल्कि कई भारतीय मूल के पेशेवर अमेरिका की बड़ी कंपनियों में नेतृत्व कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, माइक्रोसॉफ्ट में सत्य नडेला और अल्फाबेट में सुंदर पिचाई। H-1B वीजा की बढ़ती फीस के बावजूद भारतीय प्रतिभा ने वैश्विक कंपनियों में अपने करियर की सफलता का मार्ग प्रशस्त किया है। यह दर्शाता है कि योग्यता और मेहनत का मूल्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमेशा सम्मानित होता है।

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