मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत की घरेलू गैस सप्लाई पर भी साफ दिखाई देने लगा है। हॉर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही बाधित होने के बाद देश में एलपीजी के इम्पोर्ट में भारी गिरावट दर्ज की गई है। फरवरी 2026 तक जहां भारत हर महीने करीब 20 लाख टन एलपीजी आयात कर रहा था, वहीं अप्रैल आते-आते यह आंकड़ा घटकर मात्र 9.5 लाख टन रह गया।
भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा इम्पोर्ट के जरिए पूरा करता है। ऐसे में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर भारतीय ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है। सप्लाई में आई इस कमी ने तेल कंपनियों और सरकार की चिंता बढ़ा दी है।
हॉर्मुज स्ट्रेट, जो ईरान और ओमान के बीच स्थित एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा व्यापारिक रास्तों में शामिल है। वैश्विक स्तर पर बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, एलएनजी और एलपीजी इसी मार्ग से होकर विभिन्न देशों तक पहुंचता है। युद्ध और तनाव बढ़ने के बाद इस समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप जैसी स्थिति में पहुंच गई है।
जानकारी के अनुसार, जंग शुरू होने से पहले प्रतिदिन 130 से 140 जहाज इस मार्ग से गुजर रहे थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर 10 से भी कम रह गई है। इसका असर केवल भारत ही नहीं बल्कि कई देशों पर देखने को मिल रहा है जो की इस रस्ते से इम्पोर्ट करते है।
कमोडिटी मार्केट एनालिटिक्स फर्म केपीएलइआर के वेसल ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 तक भारत का औसत एलपीजी इम्पोर्ट करीब 20 लाख टन प्रति माह बना हुआ था। लेकिन मार्च 2026 में यह आंकड़ा घटकर 11 लाख टन रह गया और अप्रैल में इसमें और बड़ी गिरावट दर्ज हुई। अप्रैल के दौरान कुल आयात केवल 9.5 लाख टन रहा।
सप्लाई में कमी के चलते तेल कंपनियों ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, औद्योगिक और कमर्शियल ग्राहकों के लिए एलपीजी सप्लाई सीमित की जा रही है ताकि घरेलू जरूरतों को पूरा किया जा सके। भारत में 33 करोड़ से अधिक परिवार एलपीजी कनेक्शन का उपयोग करते हैं और बड़ी आबादी रसोई गैस पर निर्भर है।
डिमांड को मैनेज करने के लिए सिलेंडर रीफिल बुकिंग के बीच ड्यूरेशन ऑफ रिफिल भी बढ़ाया गया है। एनर्जी एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि हॉर्मुज स्ट्रेट में हालात जल्द सामान्य नहीं होते, तो आने वाले महीनों में सप्लाई संकट और गहरा सकता है।
आंकड़ों के अनुसार फरवरी 2026 में एलपीजी इम्पोर्ट सामान्य स्थिति में था, लेकिन मार्च में इसमें करीब 13 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। अप्रैल में यह गिरावट बढ़कर 16.2 प्रतिशत तक पहुंच गई। लगातार घटती सप्लाई के कारण एनर्जी सेक्टर में अनिश्चितता बनी हुई है।
भारत सरकार और आयल मार्केटिंग कम्पनीज ऑप्शनल सप्लाई रुट्स और अतिरिक्त स्टॉक मैनेजमेंट पर काम कर रही हैं, लेकिन मौजूदा हालात में एलपीजी सप्लाई पूरी तरह सामान्य होने में अभी समय लग सकता है।
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