बारिश के मौसम में सांपों के बिलों से बाहर निकलकर आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंचने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। अम्बेडकरनगर जिले में भी इस अवधि के दौरान सर्पदंश के मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 से 21 अगस्त तक जिले में 506 लोग सर्पदंश का शिकार हुए। इनमें एक व्यक्ति की मौत दर्ज की गई है।
हालांकि, स्थानीय लोगों का दावा है कि जिले में सर्पदंश से होने वाली मौतों की संख्या सरकारी आंकड़ों से अधिक है। उनके अनुसार, सांप के काटने से छह से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। यह आंकड़ा स्थानीय स्तर पर किए गए दावे पर आधारित है, जबकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक मौत दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई है।
जिले में सर्पदंश के मरीजों के उपचार के लिए जिला अस्पताल के अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और अन्य सरकारी अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध कराया गया है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मरीज के अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों की निगरानी में आवश्यक उपचार शुरू किया जाता है।
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, वर्ष 2026 में 21 अगस्त तक जिले में 506 लोग सर्पदंश का शिकार हुए। विभागीय आंकड़ों में इस अवधि के दौरान सर्पदंश से एक मौत दर्ज की गई है।
बारिश के मौसम में सांपों के बिलों से बाहर निकलने और आबादी के बीच पहुंचने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में खेतों, घरों और आसपास के इलाकों में लोगों के सांप के संपर्क में आने की घटनाएं सामने आती हैं।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सर्पदंश की स्थिति में समय पर चिकित्सकीय उपचार मिलने पर मरीज की स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है। जिले में सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर इसके उपचार की व्यवस्था की गई है।
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सर्पदंश से हुई मौतों के आंकड़ों को लेकर सरकारी रिकॉर्ड और स्थानीय दावों में अंतर सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 21 अगस्त तक सर्पदंश से एक मौत दर्ज हुई है।
वहीं, स्थानीय लोगों का दावा है कि जिले में सांप के काटने से छह से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। उपलब्ध जानकारी में इन अतिरिक्त मौतों के संबंध में कोई अलग सरकारी आंकड़ा या विस्तृत सत्यापन प्रस्तुत नहीं किया गया है।
इसलिए दोनों आंकड़ों को अलग-अलग संदर्भ में देखा जाना जरूरी है। एक ओर स्वास्थ्य विभाग का आधिकारिक आंकड़ा है, जबकि दूसरी ओर स्थानीय लोगों की ओर से किया गया दावा है।
जिले के जिला अस्पताल के साथ-साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और अन्य सरकारी अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध कराया गया है। सर्पदंश के मरीज के अस्पताल पहुंचते ही चिकित्सकों की निगरानी में उपचार शुरू किया जाता है।
स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था का उद्देश्य सर्पदंश के मरीजों को जल्द चिकित्सा उपलब्ध कराना है, ताकि उपचार में देरी न हो। विभाग के अनुसार, समय पर अस्पताल पहुंचने और आवश्यक इलाज मिलने से मरीज की स्थिति को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।
सीएमओ डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि जिले में एंटी स्नेक वेनम की पर्याप्त उपलब्धता है। उनके अनुसार, सर्पदंश के बाद समय पर अस्पताल पहुंचने और आवश्यक उपचार मिलने से स्थिति नियंत्रण में रहती है।
सीएमओ डॉ. प्रमोद कुमार ने लोगों से सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक के बजाय तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सांप के काटने के बाद उपचार में देरी करना मरीज के लिए जोखिम बढ़ा सकता है। ऐसे मामलों में पीड़ित को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना जरूरी है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को सर्पदंश को लेकर जागरूक करने पर भी जोर दिया जा रहा है। विभाग का कहना है कि समय पर अस्पताल पहुंचना उपचार की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण है।
सीएमओ के अनुसार, सांप के काटने के बाद सबसे पहले घबराना नहीं चाहिए। पीड़ित को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना चाहिए। काटे गए स्थान को साफ पानी से साफ करने की सलाह दी गई है।
पीड़ित को अनावश्यक रूप से चलने-फिरने नहीं देना चाहिए। उसे शांत और स्थिर रखने की कोशिश करनी चाहिए, ताकि अस्पताल पहुंचने तक स्थिति खराब न हो।
स्वास्थ्य विभाग ने सर्पदंश के बाद घरेलू उपचार या झाड़-फूंक में समय बर्बाद नहीं करने की सलाह दी है। विभाग के अनुसार, ऐसे मामलों में चिकित्सकीय सहायता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
सर्पदंश के बाद तत्काल उपचार शुरू होने से डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार आवश्यक चिकित्सा दे सकते हैं। जिले के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध होने की जानकारी स्वास्थ्य विभाग ने दी है।
सर्पदंश होने के बाद सबसे महत्वपूर्ण कदम पीड़ित को शीघ्र चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाना है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मरीज को चिकित्सकों की निगरानी में उपचार दिया जाता है।
इस व्यवस्था के तहत जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और अन्य सरकारी अस्पताल मरीजों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए तैयार हैं। विभाग ने लोगों से घरेलू उपायों के बजाय स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों का रुख करने की अपील की है।
सर्पदंश से होने वाली मौतों को रोकने के लिए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। जून महीने में विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ गोष्ठी आयोजित की गई थी। इस दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने-अपने कार्यक्षेत्र में लोगों को सर्पदंश से बचाव और सर्पदंश होने पर किए जाने वाले उपायों के बारे में जागरूक करने के निर्देश दिए गए थे।
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए जा रहे इन अभियानों का उद्देश्य लोगों तक सर्पदंश से संबंधित जरूरी जानकारी पहुंचाना और समय पर उपचार के महत्व के बारे में जागरूक करना है।
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