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मासूम बच्चों के सामने टूटा घर, अंबेडकरनगर में बुलडोजर कार्रवाई पर उठे सवाल

देवरिया लाला में तालाब की भूमि से अतिक्रमण हटाने पहुंची तहसील प्रशासन की टीम ने कई मकान ध्वस्त किए; ग्रामीणों ने कार्रवाई में समानता को लेकर सवाल उठाए।
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Bureau News Desk
10 Aug 2026
06:54 PM
1 min read
मासूम बच्चों के सामने टूटा घर, अंबेडकरनगर में बुलडोजर कार्रवाई पर उठे सवाल
हाइलाइट्स
अंबेडकरनगर के देवरिया लाला में तालाब की भूमि से कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई।
तहसील प्रशासन की टीम ने कई मकानों को बुलडोजर से ध्वस्त किया।
प्रेमा देवी का मकान भी कार्रवाई की चपेट में आया।
ग्रामीणों ने कुछ निर्माणों पर समान कार्रवाई नहीं होने का दावा किया, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

अंबेडकरनगर के राजेसुल्तानपुर थाना क्षेत्र के ग्राम देवरिया लाला में तालाब की भूमि पर अतिक्रमण हटाने के लिए तहसील प्रशासन की ओर से कार्रवाई की गई। रविवार को प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर कई मकानों को बुलडोजर से ध्वस्त किया। कार्रवाई की चपेट में गांव निवासी विधवा प्रेमा देवी का मकान भी आया।

मकान टूटने के दौरान प्रेमा देवी के नाबालिग बच्चे और बेटियां मौके पर मौजूद थे। परिवार के सामने देखते ही देखते मकान का एक हिस्सा और फिर पूरा आशियाना मलबे में बदल गया। कार्रवाई के बाद परिवार के सामने आवास और आगे की व्यवस्था का सवाल खड़ा हो गया है।

जानकारी के अनुसार, ग्राम देवरिया लाला में तालाब की भूमि पर कथित अतिक्रमण को लेकर मामला न्यायालय तक पहुंचा था। गांव निवासी भीमसेन ने इस संबंध में लखनऊ हाई कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की थी। बताया गया है कि न्यायालय के आदेश के बाद तहसील प्रशासन की ओर से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। प्रशासन की जांच में कई ग्रामीणों के मकान तालाब की भूमि पर पाए जाने की बात सामने आई, जिसके बाद संबंधित निर्माणों को हटाने की कार्रवाई की गई।

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प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई में रामनरायन आदि, प्रेमा देवी, रामबिलास के दोनों भाइयों और रामसकल के मकानों को ध्वस्त किए जाने की जानकारी दी गई है। कार्रवाई के दौरान प्रशासन की टीम ने कथित अतिक्रमण वाले निर्माणों को हटाया। इस दौरान प्रभावित परिवारों और स्थानीय लोगों की मौजूदगी भी रही। प्रेमा देवी का मकान भी इसी कार्रवाई में ध्वस्त किया गया। मकान टूटने के बाद परिवार के पास मौजूद घरेलू सामान और घर से जुड़ी चीजों को लेकर भी स्थिति प्रभावित हुई।

कार्रवाई का मानवीय पहलू उस समय सामने आया जब प्रेमा देवी के नाबालिग बच्चे अपने घर को अपनी आंखों के सामने टूटता देखते रहे। परिवार के मुताबिक, मकान उनके लिए लंबे समय से रहने का स्थान था। बुलडोजर की कार्रवाई के बाद घर का निर्माण मलबे में बदल गया।

मौके की स्थिति में परिवार के सदस्यों को मलबे के बीच बैठे और अपने सामान को देखते हुए देखा गया। प्रेमा देवी के लिए यह कार्रवाई इसलिए भी कठिन रही क्योंकि मकान टूटने के दौरान उनके बच्चे भी वहीं मौजूद थे। हालांकि प्रशासन की ओर से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को न्यायालय के आदेश और तालाब की भूमि से संबंधित जांच के आधार पर किया गया बताया गया है।

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कार्रवाई के बाद कुछ ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्रवाई में समानता को लेकर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि जनहित याचिका दाखिल करने वाले भीमसेन का मकान भी उसी भूमि पर पाया गया बताया गया था, लेकिन उनके मकान पर कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने मांग की है कि यदि संबंधित भूमि पर अतिक्रमण पाया गया है तो सभी मामलों में समान और निष्पक्ष कार्रवाई की जानी चाहिए। हालांकि, भीमसेन के मकान के संबंध में ग्रामीणों द्वारा किए गए इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इसलिए इस दावे को सत्यापित तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।

मामले में एक तरफ तहसील प्रशासन की कार्रवाई का आधार तालाब की भूमि पर पाए गए कथित अतिक्रमण और न्यायालय के आदेश को बताया गया है। दूसरी तरफ कुछ ग्रामीण कार्रवाई की समानता को लेकर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग देखना जरूरी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रशासन ने कई मकानों को अतिक्रमण की कार्रवाई में ध्वस्त किया है, जबकि ग्रामीणों द्वारा कुछ अन्य निर्माणों को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

मकान ध्वस्त होने के बाद प्रभावित परिवारों के सामने तत्काल आवास की व्यवस्था का सवाल भी है। खास तौर पर प्रेमा देवी के परिवार में नाबालिग बच्चे हैं और कार्रवाई के बाद उनका घर रहने लायक नहीं रह गया। उपलब्ध जानकारी में प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, वैकल्पिक आवास या आर्थिक सहायता को लेकर प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों के लिए आगे की व्यवस्था क्या होगी, यह भी स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

देवरिया लाला में हुई कार्रवाई की पृष्ठभूमि तालाब की भूमि पर कथित अतिक्रमण से जुड़ी जनहित याचिका है। गांव निवासी भीमसेन ने इस मामले को लेकर लखनऊ हाई कोर्ट का रुख किया था।

न्यायालय के आदेश के बाद तहसील प्रशासन की ओर से जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। प्रशासन के अनुसार जांच में कई मकान तालाब की भूमि पर पाए गए, जिसके बाद उन्हें हटाने की कार्रवाई की गई।

बुलडोजर कार्रवाई के बाद गांव में मुख्य रूप से दो मुद्दों पर चर्चा है। पहला, तालाब की भूमि से कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई और दूसरा, सभी संबंधित निर्माणों पर समान कार्रवाई का सवाल। जिन परिवारों के मकान ध्वस्त किए गए हैं, उनके सामने अब रहने की व्यवस्था और घरेलू सामान को सुरक्षित रखने की चुनौती है। वहीं ग्रामीण प्रशासन से कार्रवाई की प्रक्रिया और सभी संबंधित मामलों में समानता को लेकर स्पष्टीकरण की मांग कर रहे हैं।

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