अखिलेश यादव का योगी सरकार पर हमला, जातिगत मानसिकता बदलने पर उठाए पांच बड़े सवाल

UP Political News: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी सरकार के हालिया फैसले पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या यह कदम 5000 सालों से जड़ जमाई जातिगत मानसिकता को बदलने में कारगर साबित होगा। उन्होंने ट्विटर पर पाँच बड़े सवाल उठाकर सरकार की नीति पर चिंता जताई।
News Desk 22 Sep 2025, 04:45 AM 1 min read
अखिलेश यादव का योगी सरकार पर हमला, जातिगत मानसिकता बदलने पर उठाए पांच बड़े सवाल


>उत्तर प्रदेश में हाल ही में योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा लिया गया फैसला सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद नाम, नेम प्लेट, FIR और अन्य सरकारी दस्तावेजों में जाति का उल्लेख न करने का आदेश जारी किया है। इसके तहत FIR, गिरफ्तारी मेमो, पुलिस रिकॉर्ड्स और सार्वजनिक स्थानों से जाति हटाने के साथ-साथ थानों के नोटिस बोर्ड, वाहनों और साइनबोर्ड्स से जातीय संकेत हटाने के निर्देश दिए गए हैं।


>हालांकि, इस कदम पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कड़ा सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि यह केवल सतही बदलाव है और 5000 सालों से समाज में जड़ जमाए हुए जातिगत भेदभाव को खत्म करने के लिए यह पर्याप्त नहीं है।


>अखिलेश यादव ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर पाँच महत्वपूर्ण सवाल उठाए:


    >
  1. क्या यह फैसला समाज में गहरी जड़ें जमा चुकी जातिगत मानसिकता को बदल पाएगा?

  2. वस्त्र, वेशभूषा और प्रतीक चिन्हों के माध्यम से जाति दिखाने की प्रवृत्ति को मिटाने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे?

  3. किसी से मिलने पर नाम से पहले जाति पूछने की आदत को खत्म करने के लिए क्या योजना है?

  4. जातिगत भेदभाव से जुड़ी घटनाओं, जैसे किसी के घर धुलवाने या झूठे आरोप लगाकर बदनाम करने की घटनाओं को रोकने के लिए क्या कार्रवाई होगी?

  5. क्या सरकार समाज में समानता और न्याय की भावना को बढ़ाने के लिए व्यापक सामाजिक और शैक्षिक अभियान चलाएगी?


>अखिलेश यादव ने इस फैसले को केवल दिखावे वाला कदम बताया और कहा कि वास्तविक बदलाव के लिए सरकारी आदेशों के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता, शिक्षा और स्थानीय स्तर पर सतत प्रयास आवश्यक हैं।


>सरकार के इस आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि SC/ST एक्ट जैसे मामलों में छूट रहेगी और SOP व पुलिस नियमावली में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। इसके अलावा जाति आधारित रैलियों पर प्रतिबंध और सोशल मीडिया पर सख्त निगरानी की भी बात कही गई है।

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