समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शनिवार को लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए पीडीए को लेकर अपनी अलग व्याख्या रखी। उन्होंने कहा कि भाजपा पीडीए से घबराई हुई है और इसकी परिभाषा बदलने की कोशिश कर रही है। अखिलेश यादव ने पीडीए को ‘प्रेम, दया और अपनापन’ के रूप में भी बताया।
इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में बुलेटप्रूफ जैकेट उपलब्ध कराए जाने को लेकर पूछे गए सवाल पर अखिलेश यादव ने कहा कि उन्हें अभी तक जैकेट नहीं मिली है और मिलने पर वह इसकी जानकारी देंगे। उन्होंने अपनी सुरक्षा व्यवस्था और उपलब्ध कराई गई गाड़ियों को लेकर भी सवाल उठाए।
अखिलेश यादव ने इसके अलावा परिवारवाद, गठबंधन की राजनीति, जयंत चौधरी के साथ चल रहे बयानबाजी के विवाद, महंगाई, पेट्रोल-डीजल, एथनॉल, पशुपालन, प्राथमिक शिक्षा और दिव्यांगों के लिए अलग घोषणापत्र जैसे मुद्दों पर भी अपनी बात रखी।
अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी के लिए पीडीए केवल एक राजनीतिक नारा नहीं है, बल्कि लोगों को जोड़ने का माध्यम है। उन्होंने पीडीए की व्याख्या ‘प्रेम, दया और अपनापन’ के तौर पर की।
उन्होंने कहा कि समाज में जितने ज्यादा लोगों को प्रेम, दया और अपनापन के साथ जोड़ा जाएगा, संगठन उतना मजबूत होगा। उनके अनुसार भाजपा पीडीए की स्वीकार्यता से परेशान है और इसलिए इसकी परिभाषा बदलने की कोशिश कर रही है।
समाजवादी पार्टी की राजनीति में पीडीए को पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक समीकरण से जोड़कर देखा जाता रहा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने इस राजनीतिक शब्द को सामाजिक जुड़ाव के एक व्यापक संदेश के तौर पर पेश किया।
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इसी दौरान भाजपा को लेकर उन्होंने ‘भाग जाओ पाकिस्तान’ वाला तंज भी किया। यह बयान उनकी ओर से भाजपा की मौजूदा राजनीतिक शब्दावली के जवाब के तौर पर सामने आया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव से 52 प्रमुख नेताओं के लिए बुलेटप्रूफ जैकेट उपलब्ध कराए जाने की जानकारी को लेकर सवाल किया गया। इस पर उन्होंने कहा कि उन्हें अभी तक बुलेटप्रूफ जैकेट नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि जब मिलेगी तो इसकी जानकारी देंगे।
दिए गए विवरण के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 52 प्रमुख नेताओं के लिए बुलेटप्रूफ जैकेट उपलब्ध कराने की तैयारी की गई है। इनमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, अखिलेश यादव और मायावती समेत कई बड़े राजनीतिक नाम शामिल बताए गए हैं।
जानकारी के मुताबिक यह व्यवस्था सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर की जा रही है। जैकेट दो चरणों में उपलब्ध कराए जाने की बात सामने आई है। पहले चरण में आठ और दूसरे चरण में 44 नेताओं को जैकेट दिए जाने की जानकारी दी गई है।
बुलेटप्रूफ जैकेट को लेकर जवाब देने के साथ ही अखिलेश यादव ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्हें उपलब्ध कराई गई गाड़ियां अच्छी नहीं थीं।
उनकी टिप्पणी सुरक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता और उससे जुड़े इंतजामों पर केंद्रित रही। यह मुद्दा ऐसे समय उठा है जब 52 नेताओं के लिए बुलेटप्रूफ जैकेट की व्यवस्था किए जाने की जानकारी सामने आई है। अखिलेश यादव ने इस विषय पर अपने अनुभव का जिक्र करते हुए सुरक्षा से संबंधित सुविधाओं पर सवाल उठाया।
समाजवादी पार्टी पर परिवारवाद को लेकर उठने वाले सवालों के बीच अखिलेश यादव ने कहा कि देश में कई राजनीतिक दल टूटे, लेकिन समाजवादी पार्टी मजबूती से खड़ी है।
उन्होंने पार्टी में परिवार के कई सदस्यों के सांसद होने का हवाला देते हुए इसे संगठन के एकजुट रहने से जोड़कर देखा। अखिलेश यादव के बयान में परिवारवाद के आरोप का जवाब देते हुए पार्टी की आंतरिक एकता पर जोर दिया गया। उन्होंने इस मुद्दे पर भाजपा की आलोचना का जवाब अपने राजनीतिक दृष्टिकोण से दिया और कहा कि पार्टी कठिन परिस्थितियों में भी मजबूती से खड़ी है।
गठबंधन की राजनीति पर पूछे गए सवाल के जवाब में अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने किसी को नहीं छोड़ा, बल्कि लोग पार्टी को छोड़कर गए हैं। उन्होंने सहयोगी दलों के सम्मान और सीट हिस्सेदारी की बात भी कही। उनके बयान से यह संकेत मिला कि समाजवादी पार्टी आने वाले चुनाव में गठबंधन की राजनीति को खत्म करने की बजाय सहयोगियों के साथ आगे बढ़ने के पक्ष में है।
अखिलेश यादव की ओर से पहले भी सहयोगी दलों को पिछली तुलना में ज्यादा राजनीतिक हिस्सेदारी देने की बात कही गई थी। इस संदर्भ में उनका ताजा बयान गठबंधन व्यवस्था को लेकर पार्टी की स्थिति को सामने रखता है।
अखिलेश यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस ऐसे समय हुई जब राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष जयंत चौधरी के साथ उनकी बयानबाजी को लेकर विवाद चल रहा है। अखिलेश यादव की ‘चवन्नी’ टिप्पणी पर जयंत चौधरी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि अगर समाजवादी पार्टी प्रमुख को सस्ते शब्दों का इस्तेमाल करना था तो उनका नाम लेकर करते।
इसके बाद बहस में बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती की प्रतिक्रिया भी सामने आई। उन्होंने अखिलेश यादव से जाट समाज से माफी मांगने की मांग की। इस बयानबाजी ने सपा और रालोद के बीच राजनीतिक संबंधों को लेकर चर्चा को फिर तेज किया है।
समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल ने 2022 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव साथ मिलकर लड़ा था। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस गठबंधन को महत्वपूर्ण माना गया था।
इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले रालोद भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में शामिल हो गया। अब 2027 का विधानसभा चुनाव सामने है। ऐसे में दोनों नेताओं के बीच बढ़ती बयानबाजी पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई है। जाट और मुस्लिम मतदाताओं का समीकरण पश्चिमी उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। अखिलेश यादव और जयंत चौधरी के बीच मौजूदा बयानबाजी इसी व्यापक राजनीतिक संदर्भ में सामने आई है।
अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आर्थिक मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने महंगाई, पेट्रोल-डीजल और एथनॉल नीति का जिक्र किया। एथनॉल के मुद्दे पर उन्होंने सवाल उठाया कि यदि गन्ने का इस्तेमाल एथनॉल बनाने में हो रहा है, तो इसका चीनी की कीमतों पर क्या असर पड़ रहा है।
उन्होंने सरकार के आर्थिक दावों के संदर्भ में प्रति व्यक्ति आय और गरीब परिवारों की वास्तविक आर्थिक स्थिति का मुद्दा उठाया। अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार को बड़े आर्थिक आंकड़ों के साथ यह भी बताना चाहिए कि आम आदमी की आय और उसकी क्रय शक्ति में कितना सुधार हुआ है। उनके बयान में आर्थिक विकास के आंकड़ों के साथ आम परिवार की आय और खर्च की स्थिति को भी बहस का हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया।
अखिलेश यादव ने पशुपालन और गोमूत्र खरीद से जुड़े प्रस्तावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों से जोड़ते हुए पूछा कि ऐसी व्यवस्था से किसानों को वास्तविक आर्थिक फायदा किस तरह मिलेगा।
उन्होंने डेयरी कारोबार और पशुपालन को रोजगार से जोड़ने की जरूरत की बात कही। उनके मुताबिक पशुपालकों को बेहतर बाजार और सरकारी सहयोग मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है। यह मुद्दा उनके उस व्यापक राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा रहा जिसमें ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि और रोजगार को लेकर सवाल उठाए गए।
अखिलेश यादव ने 2027 के लिए समाजवादी पार्टी के संभावित सामाजिक एजेंडे पर भी बात की। उन्होंने कहा कि सत्ता में आने पर प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था में सुधार प्राथमिकता होगी। सरकारी प्राथमिक विद्यालयों की स्थिति सुधारने और गरीब तथा पिछड़े वर्ग के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने की बात उन्होंने रखी। उनके बयान में प्राथमिक स्तर की शिक्षा को चुनावी चर्चा के प्रमुख सामाजिक मुद्दों में शामिल करने पर जोर दिखाई दिया।
अखिलेश यादव ने दिव्यांगों के लिए अलग घोषणापत्र तैयार करने की बात भी कही। उन्होंने जरूरतमंद दिव्यांगों को इलेक्ट्रिक व्हीलचेयर उपलब्ध कराने की योजना का जिक्र किया।
अलग घोषणापत्र की घोषणा के जरिए उन्होंने दिव्यांग कल्याण को आगामी राजनीतिक एजेंडे का अलग विषय बनाने की बात रखी। हालांकि, दिए गए विवरण में इस घोषणापत्र के विस्तृत प्रावधान या समयसीमा की जानकारी नहीं है।
शनिवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने एक साथ कई राजनीतिक और जनसरोकार से जुड़े मुद्दे उठाए। इनमें पीडीए, भाजपा, गठबंधन, सुरक्षा, महंगाई, शिक्षा, दिव्यांग कल्याण, पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था शामिल रहे।
पीडीए की व्याख्या करते हुए उन्होंने सामाजिक जुड़ाव पर जोर दिया। भाजपा को लेकर उन्होंने तीखा राजनीतिक तंज किया। जयंत चौधरी के साथ विवाद के बीच गठबंधन के सवाल पर सहयोगियों के सम्मान और सीट हिस्सेदारी की बात कही। इसी के साथ प्राथमिक शिक्षा और दिव्यांगों के लिए अलग घोषणापत्र की बात के जरिए उन्होंने आने वाले चुनाव से जुड़े सामाजिक मुद्दों का भी उल्लेख किया।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में पीडीए को लेकर समाजवादी पार्टी और भाजपा के बीच बयानबाजी पहले से चल रही है। अखिलेश यादव ने इस बहस के दौरान पीडीए को ‘प्रेम, दया और अपनापन’ के रूप में पेश किया और भाजपा पर इसकी परिभाषा बदलने का आरोप लगाया। उनका बयान 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के बीच चल रहे राजनीतिक संवाद के एक हिस्से के रूप में सामने आया है। भाजपा की ओर से इस बयान पर प्रतिक्रिया दिए जाने की जानकारी दिए गए कंटेंट में नहीं है।
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