जिस चिप (सेमीकंडक्टर) को हम मोबाइल, लैपटॉप, टीवी, कार, मेडिकल डिवाइस और सैटेलाइट्स में इस्तेमाल करते हैं, वह आधुनिक तकनीक की ‘धड़कन’ बन चुकी है। कोरोना महामारी के बाद पूरी दुनिया ने महसूस किया कि सेमीकंडक्टर पर निर्भरता जितनी गहरी है, उतनी ही जरूरी है इसका स्वदेशी उत्पादन। अब भारत इस रणनीतिक उद्योग में एक नए हब के रूप में उभर रहा है।
सेमीकंडक्टर एक प्रकार की माइक्रोचिप होती है जो इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के ‘दिमाग’ की तरह काम करती है। इनका इस्तेमाल स्मार्टफोन, कंप्यूटर, ऑटोमोबाइल, रक्षा उपकरण, रोबोटिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसे क्षेत्रों में होता है।
आज भारत में डिजिटल क्रांति और ‘मेक इन इंडिया’ जैसी योजनाओं ने इसकी मांग को तेज़ी से बढ़ाया है।
भारत दुनिया के सबसे बड़े सेमीकंडक्टर उपभोक्ताओं में से एक है, लेकिन अभी तक इसका लगभग 100% आयात पर निर्भर है। अनुमान के अनुसार, भारत हर साल करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के सेमीकंडक्टर आयात करता है।
यह आयात न केवल विदेशी मुद्रा की निकासी करता है, बल्कि वैश्विक आपूर्ति शृंखला में रुकावट (जैसे कोविड काल) से देश की तकनीकी प्रगति भी प्रभावित होती है।
हाल ही में केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश (नोएडा के जेवर), गुजरात (डोलेरा), और कर्नाटक जैसे राज्यों में सेमीकंडक्टर निर्माण इकाइयों को मंजूरी दी है। HCL-Foxconn, Tata Electronics, और Micron Technology जैसी कंपनियां इस उद्योग में अरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं।
सरकार की ‘सेमीकंडक्टर मिशन योजना’ (Semicon India Program) के तहत 76,000 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन पैकेज दिया गया है ताकि भारत में चिप निर्माण को बल मिल सके।
भारत में मैनुफैक्चरिंग से क्या होंगे फायदे :
1. आयात में भारी कमी: भारत में निर्माण शुरू होते ही सालाना अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
2. रोजगार का सृजन: अनुमान है कि सेमीकंडक्टर फैक्ट्रियों से 50,000 से अधिक प्रत्यक्ष और 1 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे।
3. रणनीतिक आत्मनिर्भरता: रक्षा, संचार और चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में भारत को तकनीकी स्वतंत्रता मिलेगी।
4. उद्योगों को बल: ऑटोमोबाइल, मोबाइल, एआई और रोबोटिक्स क्षेत्र को सस्ते और सुलभ चिप्स मिलेंगे।
5. नवाचार को बढ़ावा: भारत स्टार्टअप्स और इनोवेशन में अग्रणी बनेगा, जिससे वैश्विक निवेश आकर्षित होंगे।
भारत अब केवल सॉफ्टवेयर शक्ति नहीं, बल्कि हार्डवेयर निर्माण की वैश्विक राजधानी बनने की ओर अग्रसर है। जैसे अमेरिका की सिलिकॉन वैली टेक्नोलॉजी का केंद्र है, वैसा ही भारत की ‘सेमी वैली’ अब वैश्विक मानचित्र पर उभर रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह सपना कि “21वीं सदी भारत की तकनीकी सदी बने”, अब सेमीकंडक्टर निर्माण से और मजबूती पा रहा है।
भारत का सेमीकंडक्टर निर्माण क्षेत्र न केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में क्रांतिकारी कदम है, बल्कि यह वैश्विक तकनीकी नेतृत्व में भारत की भूमिका को भी मजबूत करता है। यह परिवर्तन सिर्फ उद्योग का नहीं, एक तकनीकी राष्ट्रवाद का प्रतीक है — जहां चिप्स से भारत की तकदीर लिखी जा रही है।
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